
अल नीनो: प्रकृति का चक्र और वैश्विक जलवायु पर इसका प्रभाव :-
1. प्रस्तावना (Introduction) :-
अल नीनो (El Niño) स्पेनिश भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है “छोटा लड़का” या “बाल ईसा”। यह नाम 1600 के दशक में पेरू के मछुआरों द्वारा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने देखा था कि क्रिसमस के आसपास समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। वैज्ञानिक रूप से, यह ENSO (El Nino-Southern Oscillation) चक्र का हिस्सा है। यह केवल एक समुद्री घटना नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को नियंत्रित करने वाली एक शक्तिशाली शक्ति है। अल नीनो एक समुद्र में उठने वाली शक्तिशाली लहरे है जोकि यह अल नीनो अमेरिका के आस पास चलती है |

2. अल नीनो क्या है?
प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान जब सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उस स्थिति को अल नीनो कहते हैं। अलनीनो एक गर्म लहरे है जोकि आसपास के वातावरण को गर्म कर देती है |
* सामान्य स्थिति: व्यापारिक हवाएँ (Trade Winds) पूर्व से पश्चिम (अमेरिका से एशिया की ओर) चलती हैं। वे गर्म सतही जल को इंडोनेशिया की ओर धकेलती हैं, जिससे दक्षिण अमेरिका के तट पर नीचे से ठंडा, पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आता है (Upwelling)।
* अल नीनो की स्थिति: ये व्यापारिक हवाएँ कमजोर पड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप, पश्चिमी प्रशांत का गर्म पानी वापस पूर्व (दक्षिण अमेरिका) की ओर बहने लगता है।
अलनीनो के आने से भारत में भीषड़ गर्मी पड़ने लगी है और भारत में लू चलने लगी है |

3. अल नीनो का प्रभाव के पीछे का विज्ञान (The Mechanism):-
* वायुमंडलीय दबाव: जब पानी गर्म होता है, तो पानी हवा बनकर ऊपर उठती है और कम दबाव का वायुमंडलीय क्षेत्र बनाती है। और इससे बादलों का निर्माण होता है और भारी वर्षा होती है।
* थर्मोक्लाइन (Thermocline): यह समुद्र की वह परत होती है जो गर्म पानी और ठंडे पानी को अलग करती है। अल नीनो के कारण , यह परत पूर्व में गहरी हो जाती है, जिससे ठंडा पानी ऊपर नहीं आ पाता। और गर्म पानी ऊपर आ जाता है |
4.अल नीनो का वैश्विक प्रभाव (Global Impacts):-
अल नीनो का प्रभाव हर महाद्वीप पर अलग होता है:
* दक्षिण अमेरिका: पेरू और इक्वाडोर जैसे देशों में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आती है। यहाँ की मछली पकड़ने वाली अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है क्योंकि पोषक तत्व कम हो जाते हैं। यहाँ के मछुआरो को भरी नुकसान उठाना पड़ता है |
* ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया: यहाँ भीषण सूखा पड़ता है। जंगलों में आग (Bushfires) लगने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
* उत्तरी अमेरिका: अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में गर्म सर्दियाँ और दक्षिणी हिस्सों में अधिक बारिश होती है।
* अफ्रीका: पूर्वी अफ्रीका में बाढ़, जबकि दक्षिणी अफ्रीका में सूखे की स्थिति बनती है।
5. अल नीनो का भारत पर प्रभाव और मानसून (Impact on India):-
भारत के लिए अल नीनो आमतौर पर बुरी खबर होता है:
* कमजोर मानसून: भारत की 50% से अधिक खेती वर्षा पर निर्भर है। अल नीनो के वर्षों में मानसून की हवाएँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे कम बारिश होती है।
* कृषि संकट: सूखे के कारण फसलों की पैदावार कम होती है, जिससे खाद्य की माँग बढ़ती है।
* गर्मी की लहर (Heatwaves): अल नीनो के दौरान भारत में लू का प्रकोप और औसत तापमान सामान्य से अधिक रहता है। भारत में गर्मियों के समय में दिन में लू का प्रकोप बहुत होता है और लू के कारण दिन में खुले मुँह चलना मुश्किल होता है |
6. ला नीना के साथ संबंध (Relationship with La Niña)
अल नीनो के विपरीत प्रभाव को ला नीना (La Niña) कहा जाता है। इसमें समुद्र का पानी असामान्य रूप से ठंडा हो जाता है। ला नीना अक्सर भारत में अच्छी बारिश और कड़ाके की ठंड लेकर आता है।
7. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव (Economic Consequences)
* खाद्य सुरक्षा: अनाज के उत्पादन में गिरावट से दुनिया भर में भुखमरी का खतरा बढ़ जाता है।
* ऊर्जा की मांग: अत्यधिक गर्मी के कारण AC के लिए बिजली की खपत बढ़ जाती है।
* स्वास्थ्य: बाढ़ और जलभराव के कारण हैजा, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं। कियोंकि यह बीमारी जलभराब के कारण होती है |

8. जलवायु परिवर्तन और अल नीनो (Climate Change Connection)
वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अल नीनो की घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र (Extreme) हो रही हैं। 2023-2024 और अब 2026 के अनुमान बताते हैं कि समुद्र के बढ़ते तापमान ने इन चक्रों को और अधिक अनिश्चित बना दिया है।
अलनीनो ग्लोबल वार्मिंग के कारण कुछ सालो में अलनीनो की घटनाएं अधिक हो गयी है और यह अधिक तीव्र हो गयी है |











